पिता को चिंता रहती थी
बेटी के ब्याह की
मां हौसला बनाये रखती थी
सब ठीक हो जाएगा
करनेवाला भगवान है
मां को पिता से ज्यादा
भगवान पर भरोसा था
मां उनके घावों को
आंसुओं से धोती रही
शायद यही पिता का
सबसे बडा दुख था
Thursday, October 29, 2009
Sunday, September 20, 2009
जब तुझे लगे
जब
तुझे लगे
दुनिय में सत्य
सर्वत्र
हार रहा है
समझो
तेरे भीतर का झूठ
तुझको ही कहीं
मार रहा है।
तुझे लगे
दुनिय में सत्य
सर्वत्र
हार रहा है
समझो
तेरे भीतर का झूठ
तुझको ही कहीं
मार रहा है।
Saturday, September 19, 2009
वाह रे जिन्दगी
तुम्हारे होंठों पर खेलती हंसी
गुंजाती है आकाश
सुन रही हूं मैं
हा हा हा ...
कितना प्यार है
इन ठहाकों में
जिन्हें अब छू नहीं सकती
कितना दर्द है
उन आंखों में
जिसे अब
पी नहीं सकती
वाह रे जिन्दगी
तुम्हारे रूप हैं कितने ...
गुंजाती है आकाश
सुन रही हूं मैं
हा हा हा ...
कितना प्यार है
इन ठहाकों में
जिन्हें अब छू नहीं सकती
कितना दर्द है
उन आंखों में
जिसे अब
पी नहीं सकती
वाह रे जिन्दगी
तुम्हारे रूप हैं कितने ...
यही किस्सा मशहूर है
सितारों के बीच से
चुराया था आपको
पर सच तो यही है
कि मिल के बिछडना तो दस्तूर है
जिन्दगी का
हां यही किस्सा मशहूर है जिन्दगी का
बीते हुए पल
वापिस नहीं आते
यही सबसे बडा कसूर है जिन्दगी का...
चुराया था आपको
पर सच तो यही है
कि मिल के बिछडना तो दस्तूर है
जिन्दगी का
हां यही किस्सा मशहूर है जिन्दगी का
बीते हुए पल
वापिस नहीं आते
यही सबसे बडा कसूर है जिन्दगी का...
Friday, May 29, 2009
आदर्श
क्यों तय करता है इंसान
ऐसी राहें
जिसमें उसे भटकने का डर हो
जवानी के जोश में
अपने होशो हवाश खो बैठता है
और संकल्प लेता है
दुनिया को नयी राह दिखाने का
विधवाओं के सुहाग लौटाने का
सूखते होठों की लाली लाने का
इन्हीं सपनों में वह खो बैठता है
और दुनिया की रंगीनियों में
इस कदर डूब जाता है
कि उसे भी आशा हो जाती है
एक ऐसे नाविक की
जो उसे पार उतार सके।
ऐसी राहें
जिसमें उसे भटकने का डर हो
जवानी के जोश में
अपने होशो हवाश खो बैठता है
और संकल्प लेता है
दुनिया को नयी राह दिखाने का
विधवाओं के सुहाग लौटाने का
सूखते होठों की लाली लाने का
इन्हीं सपनों में वह खो बैठता है
और दुनिया की रंगीनियों में
इस कदर डूब जाता है
कि उसे भी आशा हो जाती है
एक ऐसे नाविक की
जो उसे पार उतार सके।
Friday, May 22, 2009
आज जान पायी हूं
क्या मोह से परे
कोई चीज होती है
संभवत: प्रेम
बहुत कमजोर
ऐसे भी क्षण आए जीवन में
जब लगा
प्रेम मैंने तुमसे किया है
ओह,खंडित मोह,वह प्रेम ही था
आज जान पायी हूं
जीवन की इस मध्यावस्था में।
कोई चीज होती है
संभवत: प्रेम
बहुत कमजोर
ऐसे भी क्षण आए जीवन में
जब लगा
प्रेम मैंने तुमसे किया है
ओह,खंडित मोह,वह प्रेम ही था
आज जान पायी हूं
जीवन की इस मध्यावस्था में।
षडयंत्र - आभा
क्या मैं
टूटती जा रही हूं
वह कैसी दुर्घटना थी
या कि था षडयंत्र
आदमी से पहले
उसका नाम
और फिर उसकी
पूरी दुनिया
छीन लेने का।
टूटती जा रही हूं
वह कैसी दुर्घटना थी
या कि था षडयंत्र
आदमी से पहले
उसका नाम
और फिर उसकी
पूरी दुनिया
छीन लेने का।
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